Tuesday, August 7, 2018

On August 07, 2018 by Unity in diversity in    No comments
मध्यप्रदेश ,राजगढ़ (धार) ।  

     वर्तमान में तिलक मार्ग चबुतरा चौक पर भैरुजी का मन्दिर बना हुआ है पर इतिहास के पन्नों का अगर खोल कर देख जाए तो उस स्थान पर संवत 1914 (सन् 1858)के साल की बात है यह एक माताजी की कथा के अनुसार यह बात हमें पता चली बुजुगो से मिली चैना माताजी क कथा जो कुछ कहती है संवत् 1888 (सन् 1828 के साल राजगढ़ में अकाल पढ़ा,आमजन के पास न तो काम था न ही खाने गुजारे के लिए कुछ था पूज्य चैना माताजी की प्रेरणा से कोदरजी व्यास ने आमजन का पालन होने की गरज से राजगढ में मालीपूरे क ेपास बावड़ी ख्ुदाने का काम शुरु करे आमजन को काम लगाया इन लोगो की मजदूरी के एवज में खाने को अनाज देते थे जिससे आमजन का पालन होता रहा व अकाल का समय गूजर गया। बावड़ी का काम पत्थर चुने से तैयार किया जो बावड़ी अब चैना माताजी के नाम जाना जाता है बावड़ी के उत्तर पूर्व कौने में अराजी सोला बिसवा जमीन अमझेरा के राजा बख्तावर सिंह जी ने बावड़ी बनाने में माफी दी थी।
 संवत् 1914 (सन् 1858) की गदर का जमाना था डाकु जजबा अपना गिरोह इकट्ठा करवाकर गांव लूटते थे,गांव लुटने से पहले ये लोग जंगल में मुकाम करके गांव के अधिकारी से आसुदार (धनवान) जबरन वसूल करके डाकु लोगों को देते थे। इस तरह गांव के लोग कई मर्तबा इस फला रुपया दे चुके थे परन्तु डाकु लोग हर वश्रत आकर नहीं देते थे इन लोगो मे शामिल भागचंद जी को भी हवालात में बंद कर दिया, दो रोज तक हवालातियो को रोटी पानी नहीं दिया तीसरे रोज इन हवालातीयों के बहुत से वारि इकट्ठा होकर श्री चैना माताजी के साथ किले गये ,रोटी पानी देने कोा की मगर रुपये दिये बिना न खाने नहीं छोडे तब सब लागे को क्रोध आ गया और श्री चैना माताजी के पास गये तब श्री चैना माता ने कहा कि राजा का अन्त आ चुका है व श्री चैना माताजी के नेतृत्व मे चैना माताजी तलवार लेकर लोगो के साथ हमला किया । भयानक युद्ध हुआ,अचानक देवी की क्पा से हवालात के ताले गये।उनके साथ एक बूढ़ी औरत जो राजगढ़ के छगन्याती ब्राम्हण कनकरजी भी थी। चैना माताजी व कनकरजी का माथा धोखे से काट दिया जो वर्तमान के चबुतरा चौक पोरवाल धर्माला के सामने गिरा (वहा भैरुजी का छोटा सा मन्दिर बना हुआ है।) लेकिन श्री चैना माताजी को सत आ गया व लड़ते-लड़ते बावड़ी तक आई और वहा पर धड़ भी गिरा व शरीर गुलाब के फलों का ढेर बन गया ।इस वारदात में गांव के 54 आदमी भी घायल हुए थे तब से श्री चैना माताजी का चबुतरा बनाकर हमारे पूर्वजों ने स्थापित किया। जहां अब एक भव्य मन्दिर का निमार्ण किया गया है व श्री चैना माताजी की पिण्ड व मॉ गायत्री, मॉ लक्ष्मी ,मॉ सरस्वती व मॉ अन्नपूर्णा की सुन्दर मूतिर्यों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। ऐसी कई चमत्कारिक घटनाए है।
     श्री चैना माताजी सती होकर गांव की सुख समृद्धि के लिए जीये व गांव के लिए बलिदान दिया। गांव के लोग आज भी सच्चे मन से अपनी मनोकामना के लिए मन से ध्यान करता है तो माता उसकी हर इच्छा पूरी करती है।

 अक्षय आजाद भण्डारी राजगढ़ धार  9893711820 

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