Tuesday, August 7, 2018

On August 07, 2018 by Unity in diversity in    No comments
  

  राजगढ़(धार)। राजगढ़ नगर में पांच धाम एक मुकाम माताजी मन्दिर लगभग 300 वर्ष पुराना मन्दिर है यहा अम्बे मां लक्ष्मी जी एंव कालिका माॅ की प्रतिमाए है मन्दर के गर्भबगृह में दक्षिण कालिका कामाक्षादेवी का मन्दिर जहा माता अपने भक्तो की हर मनोकामना पूरी करती है बताया जाता है कि हरियाणा निवासी बड़े गुरुजी मुरजीधरजी को लगभग 100 वर्ष पूर्व इस स्थान के बारे में सपना आया था वो यहा आए और इसका जीणोद्धार करवाया गया। यहा दुर दूर से भक्त दर्षन के लिए आते है खासकर नवरात्री क दिनों में क्योकी यहा गर्भग्रह में विराजित माता का पट अष्टमी और नवमी में खुलता है।
 इस मन्दिर में मंशामहादेव मन्दिर भी है जो सरदारपुर तहसील से अनेक भक्त मंशामहादेव व्रत के लिए यहां आते है।

 नगर व आसपास के क्षेत्रो मे इस मन्दिर को बावड़ी वाले मन्दिर से जाना जाता है क्योकीं यहा बावड़ी तो है लेकिन प्राचीनसमय में इसका जलस्तर राजगढ़ नगर से बहुत दूर बड़नगर के लोगो के लिये भी चर्चा का विषय बना रहा है उनके अनुसार श्री श्री 1008 श्री गुरु महाराज मुरलीधरजी महाराज वैसे हरियाणा प्रान्त बोैन्द कलां से राजगढ़ आए थे बाल्य अवस्था से पूज्य गुरुदेव मुरलीधरजी महाराज की धर्म के प्रति गहरी आस्था रही है और हरियाणा के जिला भिवानी तथा बनारसग (काशी) में वेद वेदांग व ज्योतिष का अध्ययन किया तथा कामरुप देश आसाम में ता़ित्रक शिक्षा ग्रहण कर सिद्धिया प्राप्त की थी। मुरलीधरजी महाराज ने यहा मां कामक्षा देवी कालिका जी का सिद्ध मन्दिर माताजी मन्दिर के नाम से राजगढ़ में स्थापित किया था वे संवत् 2005 से 2036 तक इनका कुटुम्ब वालो को पता नहीं चला था उस समय इनकी आयु 33 वर्ष थी राजगढ़ आकर एक ब्रह्राचारी वेष धारण कर उन्होने अपने जीवन को समाज सेवा मे समर्पित किया था। चार वर्ष तक अखण्ड तपस्या भी कि थी।


  इस बावड़ी से बड़नगर मिलती थी सुचना...

   बावड़ी में स्थित गोमुख से निर्मल जल प्रवाहित हुआ करता था जिसका पान कर आनंद कि अनुभूति होती थी। प्राचीन समय बावड़ी का जल स्तर बढ़ जाया करता था  और बावड़ी का जल बाहर बहने लगता था वो बड़नगर निवासी अपनी अनाज की बखारीयों को खाली कर लिया करते थे प.पू. पुरुषोत्तम भाऱद्वाज के अनुसार बड़े गुरुदेव मुरलीधरजी कहा करते थे कि बावड़ी का जल देखने बड़नगर के लोग यहा आए है और जलस्तर देख बड़नगर में इसकी सुचना दे दी जाती है और वह अपनी बख्खारी मे से अनाज खाली कर लिया कर लेते थे।
   आज भी इसी मन्दिर पर परम पूज्य मुरारीलालजी भारद्वाज व नारायण भारद्वाज और ज्योतिष व कथावाचक पुरुषोत्तम भारद्वाज विराजित है और इनका आर्शीवाद पुरे क्षेत्र को मिलता है। साथ ही परम पूज्य य गुरुदेव मुरलीधरजी महाराज कि प्रतिमा भी विराजित है।

0 comments:

Post a Comment